1929 में लेबर पार्टी की सरकार बनी जिन्होंने गवर्नर जनरल लार्ड इरविन को इंग्लैंड बुलाया और मंत्रणा की जिसके अनुरूप इरविन ने घोषणा की ..भारत को अंत में औपनिवेशिक स्वराज्य दिया जाएगा जिसे लेकर गांधी ने इरविन से भेंट की लेकिन गांधी जी के पूछने पर उन्होंने पर्याप्त आश्वासन नहीं दिया इसी बीच लाहौर में कॉंग्रेस का अधिवेशन हुआ अब तक यह निश्चित हो गया कि नवगठित ब्रिटिश सरकार भी कुछ देने वाली नहीं है ।
तब क्षोभ और निराशा के माहौल में अधिवेशन बुलाया गया जिसमें पूर्ण स्वाधीनता के प्रस्ताव पास किये किये गए तथा रावी नदी के 31 दिसम्बर 1929 को मध्यरात्रि में तिरंगा फहराया गया और प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया ।
सरकार द्वारा नेहरू रिपोर्ट को अस्वीकृत कर दिया गया था था , कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में गांधी जी द्वारा प्रस्तुत 11 मांगे नहीं मानने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन की चेतावनी दी गयी । परंतु ब्रिटिश सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और प्रसिद्ध दांडी यात्रा से नमक कानून का उल्लंघन कर " सविनय अवज्ञा आंदोलन " का श्री गणेश किया गया ।
इस आंदोलन के कार्यक्रम में नमक बनाना , विदेशो वस्रों की होली , शराब -अफीम की दुकानों पर धरना , अश्पृश्यता का त्याग , सरकारी शिक्षण संस्थानों का त्याग तथा जंगल कानून तोड़ा गया । सरकार ने आंदोलन को बढ़ता देख तीव्र दमन चक्र चलाया और बड़ी मात्रा में गिरफ्तारी , जेल भरो , सरकार ने संपत्ति की नीलामी और बलात ग्रहण किया , कॉंग्रेस को अवैध संगठन घोषित कर दिया
इन्ही परिस्थितियों में प्रथम गोलमेज सम्मेलन नवम्बर 1930 में बुलाया गया जिसमें कांग्रेस ने भाग नही लिया। ब्रिटिश शासन को समझ आ गया कि कांग्रेस से बातचीत किये बिना समस्या का हल नही होगा और इरविन , गांधी जी से बात करने राजी हो गए ।
1931 में प्रसिद्ध गांधी इरविन समझौता हुआ कुछ कांग्रेसी इस समझौते से प्रसन्न नहीं थे , सुभाषचंद्र बोस और उनके समर्थकों ने तीव्र असंतोष प्रगट किया उनका मत था इतने बड़े बलिदान पर विशेष लाभ नहीं मिला । युवा वर्ग निराश इसलिए थे क्योंकि गांधी जी ,भगतसिंह और उनके साथी की सजा परिवर्तित नहीं करा सके । 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया गांधी जी इसमें शामिल हुए इस सम्मेलन से कोई समस्या का हल नहीं निकला और सम्मेलन पूरी तरह असफल रहा ।
विलिंगटन भारत ने नए गवर्नर जनरल बनें उन्होंने गांधी इरविन समझौत के सभी शर्तों भंग करना आरंभ किया । गांधी जी पुनः सविनय आंदोलन प्रारम्भ कर दिए जिसका कठोर दमन किया गया । गांधी जी को बंदी बना जेल में डाल दिया कांग्रेस को अवैध संगठन घोषित कर दिया , समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया । 1934 में आंदोलन स्थगित हो गया ।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की खास बात रही इसमे महिलाओ ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया विभिन्न स्थानों पर जंगल सत्याग्रह से लोंगो में ब्रिटीश सरकार का विरोध करने की हिम्मत आयी , और निराशा के दौर में स्वतंत्रता संग्राम को हवा देती रही । ब्रिटिश सरकार अब भारतीय नेतृत्व गांधी जी से समझौता करने की स्थिति में आ गयी थी ।
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